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सुजानपुर टिहरा

सुजानपुर

सुजानपुर टिहरा की स्थापना कांगड़ा रियासत के कटोच वंशज राजा अभय चंद द्वारा सन 1748 (ई०पू०) में की गई थी | यहाँ पर रामपुर के नवाब गुलाम मोहम्मद की एक कब्र भी है। टिहरा और सुजानपुर में पांच प्राचीन मंदिर और सुजानपुर में राजा संसार चंद की बारा-दरी (कोर्ट रूम) स्थापित हैं | राजा संसार चंद द्वारा अपनी मां की पवित्र स्मृति में 1793 ई०पू० में बनाया गया गौरी शंकर का मंदिर भी देखने योग्य है | राजा संसार चंद की सुकेत रानी प्रसन्नी देवी द्वारा 1790 और 1823 ई०पू० में बहुत ही सुन्दर मुरली मनोहर और नर्वदेश्वर मंदिरों का निर्माण करवाया गया था। महादेव मंदिर, देवी मंदिर और ऋषि व्यास को समर्पित व्यासेश्वर मंदिर भी यहाँ पर सुसज्जित हैं | यह क्षेत्र में पहली बार ‘ट्रैवेक’ नामक एक जर्मन, और उसके बाद मूरक्राफ्ट नामक एक ब्रिटिश यात्री द्वारा दौरा किया गया था। सुजानपुर पैराग्लिडिंग, एंगलिंग, राफ्टिंग आदि साहसी खेलों के लिए उपयुक्त है | इसके आसपास अच्छे ट्रेकिंग रूट भी हैं ।

इन के अतिरिक्त, यह स्थान हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े चौगान (मैदान) के लिए भी प्रसिद्ध है ।  होली के उपलक्ष पर लगने वाला 4 दिवसीय राज्य स्तरीय मेला इस एतिहासिक चौगन में ही मनाया जाता है | प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा भी इस जगह पर स्थित है। इस संसथान से प्रतिवर्ष भारतीय रक्षा सेवाओं में बहुत से विद्यार्थियों का चयन होता है ।

नादौन

प्राचीनकाल में, इसका प्रयोग नादौन जागीर के मुख्यालय के रूप में किया जाता था | कांगड़ा के महाराजा संसार चंद ने यहाँ पर अपने शासनकाल के दौरान कई वर्षों तक गर्मी के दौरान अपने न्यायालय का आयोजन किया था। नादौन को बिलकेलेश्वर महादेव मंदिर के लिए भी जाना जाता है जिस का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया था । नादौन अपने खूबसूरत लोगों के लिए प्रसिद्ध है | यहाँ पर सन 1929 में एक गुरुद्वारा भी स्थापित किया गया था। राजा संसार चँद द्वितीय के शासनकाल के दौरान, नादौन एक बहुत महत्वपूर्ण स्थान हुआ करता था । कांगड़ा पहाड़ी क्षेत्र में एक बात प्रचलित थी की “जो आए नादौन तो जाये कौन” । इस तथ्य से समझा जाता है कि नादौन में दो सौ गायक एवं नर्तकियां थीं और जो भी यहाँ पर आता था इनके जादू के वशीभूत होकर कभी भी जा नहीं पाता था । इस बात का उल्लेख गुलाम मोहिउद्दीन ने तारीख-ए-पंजाब में भी किया है । यह एक शांतिपूर्ण शहर है और यहाँ पर अच्छा विश्राम गृह, एक पुराना महल और प्राचीन शिव मंदिर भी दर्शनीय हैं । अमतर के पुराने महल में अब भी उस समय के कुछ दुर्लभ चित्रों को संजो कर रखा गया है । 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ जवालाजी मंदिर भी यहाँ से आसानी से यहां जा सकता है। यह स्थान शहर के साथ बहती व्यास नदी में महाशीर मछली पकड़ने के लिए भी उत्कृष्ट सुविधाएं प्रदान करता है । व्यास नदी पर नादौन से देहरा के बीच राफ्टिंग की सुविधा भी इस स्थान को एक और आकर्षण प्रदान करता है । एंगलरों के लिए भी यहाँ पर सुंदर कैम्पिंग स्थान हैं |

व्यास नदी के तट पर स्थित एच०पी०सी०ए० (हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन) द्वारा स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी क्रिकेट स्टेडियम भी एक सुंदर दर्शनीय स्थल है।

दियोटसिद्ध

सिद्ध-बाबा-बालक-नाथ

यह बिलासपुर (70 किलोमीटर) और हमीरपुर (45 किलोमीटर) जिला की सीमा पर स्थित सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में स्थित है और सभी तरफ से सड़कों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। नवरात्रों के दौरान, बाबाजी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु दियोटसिद्ध आते हैं । चैत्र मेला का त्योहार श्री सिद्ध बाबा बालाक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में हर साल 14 मार्च से 13 अप्रैल तक मनाया जाता है। मंदिर न्यास रहने एवं पानी, शौचालयों और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान करती है। शाह-तलाई से दियोटसिद्ध मंदिर के लिए लिए प्रस्तावित रोप-वे की स्थापना और अतिरिक्त आवास आदि व्यवथाएं पूर्ण होने पर और अधिक पर्यटकों के आने की सम्भावना है । यह मंदिर हिमाचल राज्य की सबसे बड़े आय संस्थानों में से एक है | हर साल देश भर से 45 लाख के लगभग श्रद्धालू यहाँ आते हैं । रविवार को बाबाजी का शुभ दिन माना जाता है और फलस्वरूप इस दिन भक्तों का विशाल जनसमूह दर्शन करने हेतु दियोटसिद्ध मंदिर आता है ।

अधिक जानकारी हेतु कृपया मंदिर अधिकारी: +91+1972-286354 अथवा सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध से संपर्क करें |

मारकंडा

मारकंडेय ऋषि के स्थल के रूप में प्रसिद्ध यह स्थान हमीरपुर जिला में डेरा परोल से 6 किलोमीटर की दूरी पर कुनाह खड्ड के किनारे पर स्थित है | पुराणों के अनुसार यहाँ पर मारकंडेय ऋषि की प्रतिमा स्थापित की गई थी | यहाँ पर एक प्राकृतिक जल स्रोत भी है | यहाँ पर लगने वाला मारकंडा मेला भी काफी प्रसिद्ध है |

भोटा

यह स्थान धर्मशाला से शिमला मार्ग पर हमीरपुर शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | यह स्थान राधा स्वामी सत्संग डेरा व्यास द्वारा संचालित एक धर्मार्थ अस्पताल के लिए प्रसिद्ध है |

गसोता

यह स्थान हमीरपुर-जाहू रोड पर हमीरपुर से 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर 400 साल से अधिक पुराना भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थित है। विभिन्न स्थानों के लोग भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के लिए इस पवित्र स्थान पर जाते हैं। एक प्रसिद्ध पशु मेला हर साल ज्येष्ठ महीने (आमतौर पर मई माह के मध्य में) के पहले सोमवार को गसोता में आयोजित किया जाता है | इस दौरान आसपास के इलाकों और पड़ोसी राज्यों के लोग प्राचीन शिवलिंग के दर्शन और पशु व्यापार के लिए आते हैं। यह बहुत सुंदर जगह है | मंदिरों के समीप बहता प्राकृतिक जल इसकी सुंदरता को चार चाँद लगा देता है | आगंतुकों की सुविधा के लिए मंदिर के परिसर में गौशाला और पांडु सरोवर का भी निर्माण किया गया है ।

लम्बलू

शनि देव मंदिर के लिए प्रसिद्ध गांव सरलीं (लम्बल) हमीरपुर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। विभिन्न स्थानों के लोग शनि मंदिर के दर्शन एवं तुला दान के लिए यहाँ आते हैं। सप्ताहांत पर और विशेष रूप से ज्येष्ठ शनिवार को यहाँ पर भारी भीड़  होती है । मंदिर का प्रबंधन हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्थानों और चैरिटेबल एंडॉमेंट अधिनियम के तहत स्थापित मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

हमीरपुर

समुद्र तल से लगभग 786 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हमीरपुर शहर एक शांत एंड सुरम्य स्थान है | राजा हमीर चंद के नाम पर स्थापित इस शहर का एक गौरवमयी इतिहास रहा है | इस क्षेत्र के बहुत से लोगों ने शिक्षा, रक्षा सेवाओं, खेलों, प्रशासनिक सेवाओं एवं प्रोद्योगिकी जैसे क्षेत्रों मैं सेवा करके एक अलग पहचान बनाई है | विगत कुच्छ वर्षों में यह शहर प्रदेश में शिक्षा के अग्रणी स्थानों में शामिल हुआ है | यहाँ पर हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्विद्यालय, डा० राधा कृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, राष्ट्रिय प्रोद्योगिकी संस्थान, होटल प्रबंधन संस्थान, औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बहु तकनीकी संस्थान एवं स्कूल स्तर के उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान हैं | इसके अतिरिक्त यहाँ पर कुछ निजी शिक्षण संस्थान भी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में शामिल हैं | यह सभी संस्थान हमीरपुर शहर से 5 से 8 किलोमीटर के बीच स्थित हैं | इस क्षेत्र से अधिकांश लोग रक्षा सेवाओं में कार्यरत हैं, जिस कारण प्रदेश सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक और हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक निगम के प्रबंध निदेशक के कार्यालय भी हमीरपुर शहर में स्थित हैं |